Wednesday , September 30 2020

प्रमुख समाचार


विज्ञापन

Home / पूर्वांचल समाचार / आज़मगढ़ / स्वयं की प्रशंसा करना आत्म हत्या के समान है – स्वामी ब्रह्मेशानन्द

स्वयं की प्रशंसा करना आत्म हत्या के समान है – स्वामी ब्रह्मेशानन्द

पूर्वांचल डेस्क आजमगढ़ “मेहनगर” रिपोर्ट :- बृजभूषण रजक

आजमगढ़। तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर शिव मन्दिर प्रांगण में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्री हरि कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिन का शुभारम्भ सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के स्वरूप (प्रतिमा) पर दीप प्रज्ज्वलित ललई सिंह, शकील अन्सारी, अमरनाथ यादव, इन्द्रजीत यादव, दीपनरायण गुप्ता, सीताराम यादव के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्या रेनू भारती एवं सुषमा भारती द्वारा-जयकारा-जयकारा लगाओ भोले बाबा का ……. कइसन-कइसन भूत कइसन-कइसन सांप अरे बाप रे बाप, आइल भोले की बरातिया अरे बाप रे ……….. भजन के माध्यम से सबको भक्ति रस में रंगते हुये खूब थिरके। 
गोरखपुर से आये कथावाचक स्वामी ब्रह्मेशानन्द महाराज जी ने शिव विवाह प्रसंग में शिव शक्ति को सर्वश्रेष्ठ बताते हुये कहा कि पार्वती का विवाह शिव से 108 बार इसलिये हुआ कि पार्वती शिव को शरीर समझती थी और बार-बार शिव को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थी। नारद जैसे पूर्ण संत की पे्ररणा ने 108 बार जन्मों के रहस्य को जानने के लिये प्रेरित किया। तब शिव ने पार्वती बतया कि तुम 108 तक मुझे शरीर समझती रही जिसके कारण तुम्हें बार-बार जन्म लेना पड़ा, जबकि मैं अजन्मा और अमर हूं। पार्वती के इस दुविधा को मिटाने के शिव ने अमरनाथ गुफा में अमरकथा का रसपान कराया, तत्पश्चात् ब्र्रह्मज्ञान प्रदान कर दिव्य नेत्र का कपाट खोल दिया तब पार्वती शिव में विलीन हो गयी। बताया कि जो मनुष्य अपनी प्रशेसा स्वयं करता है वह मनुष्य अपनी आत्म हत्या स्वयं करता है। हमारे पास एक मन है जो आज काम, क्रोध, मोह, लोभ और वासना में लिप्त है। यहीं समाज के विध्वंश का कारण बनता जा रहा है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित न किया गया तो यह भयावह रूप ले लेगा जिससे उबरना सामान्य इन्सान के वश में नहीं है। ये घोर कलयुग है मन को वश में करने के लिये ब्र्रह्मज्ञान ही एक माध्यम है। और एक पूर्ण संत द्वारा ही संभव है।
कार्यक्रम का संचालन महात्मा कृष्णा जी ने बताया कि सारा खेल मन का है। मन के अनुसार जीवन चलता है। मन को एक्रागित करके दिशा को परिवर्तित किया जा सकता है। श्रद्धायें बार-बार मरती हैं, लेकिन विश्वास नहीं मरता है।
इस अवसर पर मुन्नालाल, शिवनाथ सरोज, बाल किशुन सरोज, दीपक सिंह, मनोज मद्धेशिया, गोविन्द राम, आशीष कुमार, सोफी राम हवलदार यादव राजेन्द्र सरोज, लटरू सरोज, रामप्यारे पाण्डेय बाल किशुन सरोज आदि लोग उपस्थित रहे।

About Bharat Good News

error: Content is protected !!