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सही नीति से बदली जा  सकती है सामाजिक एवं आर्थिक विषमता : बलिहारी बाबू

आजमगढ़-डेस्क-रिपोर्ट-सोनू पंडित- सिटी रिपोर्टर 
आजमगढ़। सावित्री बाई फूले की 187वीं जयंती अहरौला के बस्ती भुजवल (बसही बाजार) में मनायी गयी। जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद बलिहारी बाबू मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हनुमान शर्मा व संचालन सुनील सैनी ने किया।
जयंती समारोह संबोधित करते हुए पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने कहा कि सांसद विधायक और मंत्री बनने से ज्यादा जरूरी है बहुजन समाज में जन्मे महापुरूषों के मिशन व संघर्षो को आगे बढ़ाया जाये। पूर्व सांसद ने आगे कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक विषमता को बदलने के लिए राजनीति की नहीं बल्कि नीति का आवश्यकता है, नीति तभी लागू होगी जब जरूरमतंद बहुजन समाज में स्व सम्मान व स्वविश्वास पैदा होगा। यह तभी संभव है जब बहुजन समाज जागरूक होगा यानि उनमें शिक्षा होगी, सोचने की शक्ति होगी। जरूरतमंद समाज में एकता व भाईचारा होगा तभी व्यवस्था में बदलाव सम्भव है। इसके लिए भाषण नहीं सांसद, विधायक, मंत्री के रूप में देश के शासन-प्रशासन में भागीदारी की जरूरत है। सत्ता लोलुप नेताओं और पूंजीवादी सोच से यह कार्यसम्भव नहीं है। विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति तथा साधन सम्पन्न व्यक्ति इन दोनां के विचार अधिकार व साधनविहीन व्यक्तियों का भला नहीं कर सकते बल्कि विभिन्न जातियों के बीच संघर्ष और समाज विरोधी भावना पैदा करेंगे। दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को ह्ेय भावना से देखेंगे। ऐसे विचार के लोग यदि सत्तासीन हुए तो सामाजिक व्यवस्था को कानूनी और कट्टर बना देंगे। जो पहले परिवर्तनशील थी तथा समाज में ऊंचनीच, भेदभाव, छुआछूत, स्त्री-पुरूष, अगड़ा-पिछड़ा का भेद करके एक दूसरे में नफरत पैदा कर देंगे। ऐसी दशा में नफरत की बुनियाद परं समाज का भला नहीं हो सकता। आज समाज में नफरत ही फैलायी जा रही है। कहीं हिन्दू-मुस्लिम के बीच, अगड़ी-पिछड़ी के बीच एक जाति से दूसरी जाति के बीच नफरत फैलाकर रिएक्शन में सत्ता प्राप्त कर रहे है न कि किसी मिशन के तहत। समाज जो पूर्व से ही वर्णो के आधार पर चार भागों में विभाजित है को छह भागों में सवर्ण, अल्पसंख्यक, यादव से इतर अन्य पिछड़ी जातियां व चमार से इतर अति दलित जातियों में बांटने का काम किया जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि अति पिछड़ा व अति दलित जातियां पूर्व विभाजन में नहीं रही है। आज देश के विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए, सामाजिक एकता के लिए, सामाजिक कलह की समाप्ति के लिए अच्छी सोच के लिए, सामाजिक व नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए ज्योतिबाराव फूले, सावित्रीबाई फूले, छत्रपति साहू जी महाराज, संत गाडसे, संत कबीर, नरायणागुरू, डा भीमराव अम्बेडकर, डा लोहिया तथा कांशीराम जी जैसे महापुरूषों के कल्याणकारी विचार समाज में प्रसारित किये जाने की नितांत आवश्यकता है।
अन्य वक्ताओं में राधश्याम  सैनी, पंचम बाबू, इंजी सहदेव, श्रीमती बबिता गौतम, राजेंद्र मास्टर, ज्ञानचन्द्र, मूलचंद चौहान, मुन्नू मौर्य, भजुराम यादव, गोपाल निषाद,सुनील गोंड, रामसुधार मौर्य, सिकंदर प्रसाद कुशवाहा, रामपलट गुप्ता आदि ने अपने विचार रखें।
जंयती समारोह में कालीचरण, डा कालिका प्रसाद, नागेंद्र विश्वकर्मा, अरूण चौहान, राजकुमार, महेंद्र गोंड, शंकर माली, तुफानी माली, जर्नादन, मनोज सैनी, सुनील विश्वकर्मा, प्रवेश गुप्ता, राममिलन, अंगद शर्मा, संदीप यादव, महेंद्र गुप्ता, मनीष प्रजापति आदि लोग मौजूद रहे।

 

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