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शिमला घूमने निकले है तो यहां जरूर जाईए

 

शिमला, राज्य ब्यूरो। Tourist place around shimla पहाड़ों पर कुदरत ने खूबसूरती के रंग भर रखे हैं, लेकिन ऐसे कई स्थल भी हैं जो अनछुए हैं। शिमला के रिज मैदान, मालरोड विश्वविख्यात हैं मगर आसपास ऐसे स्थान भी हैं जो सैलानियों को सुकून के पल दे सकते हैं। लेकिन ऐसे क्षेत्रों पर किसी की नजर नहीं पहुंची है। शहर के साथ लगती पंचायतों ने ऐसे स्थलों की सुध ही नहीं ली है। आज की भागमभाग भरी जिंदगी में हर व्यक्ति चाहता है कि कुछ पल शांति से गुजारे जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में आस्था के केंद्र पौराणिक मंदिरों से नई पीढ़ी को परिचित करवाया जा सकता है।

पर्यटन का हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 फीसद योगदान है। पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले युवा सुधीर जस्वाल, शैलेंद्र ठाकुर और सुरेश डोगरा का कहना है कि शिमला शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक देव स्थल हैं। इसके अतिरिक्त प्राचीन तालाब और मैदान भी हैं, जहां पर पर्यटकों को पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

पक्षियों के साथ समय गुजारना हो तो आएं साधुपुल  

जो लोग पक्षियों की चहचहाट सुनना चाहते हैं उनके लिए साधुपुल से  बेहतर स्थान कोई नहीं है। यहां से अश्विनी खड्ड गुजरती है। इसमें पानी पूरा साल बहता रहता है। बताते हैं पक्षियों की कई प्रजातियां यहां पर देखने को मिलती हैं। उनकी चहचहाट से पैदा होने वाला कोलाहल मन को मोह लेता है। कभी पक्षी पानी के आसपास नजर आते हैं तो कभी पेड़ों की टहनियों पर पीले, लाल रंग की चिड़ियां देखने को मिलती हैं।  कालका-शिमला नेशनल हाईवे से आते कंडाघाट से 12 किलोमीटर दूर साधुपुल पहुंचा जा सकता है। यदि कोई शिमला से होकर जाना चाहे तो जुन्गा होते हुए करीब 30 किलोमीटर सफर कर इस सुंदर जगह पर पहुंचा जा सकता है।

तानु जुब्बड़ झील की गहराई का अंदाजा नहीं

तानु जुब्बड़ झील मशहूर नारकंडा पर्यटन केंद्र से नौ किलोमीटर दूर है। इस खूबसूरत जगह पहुंचकर कोई भी पूरा दिन गुजार सकता है। नीले पानी से भरी झील की गहराई का आज तक कोई अंदाजा नहीं लगा पाया है। प्राकृतिक झील के एक किनारे पर नाग देवता खाचली का पुरातन मंदिर है। हर साल जुलाई के अंत में यहां मेला लगता है। उसमें कोटगढ़ क्षेत्र के मैलन के देवता चतुर्मुख आते हैं। झील की खासियत यह है कि यह सर्दियों में जम जाती है।

प्रकृति की गोद में है सरयूण मैदान

कनाग नाग देवता का निवास संधू से पहले देवी मोड़ से रास्ता जाता है। यहां पर बड़ा मैदान है, जिसे सरयूण मैदान कहते हैं। यहां पर कनाग नाग देवता का मंदिर भी है। यह स्थल ठियोग से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर है। इस जगह बहुत कम लोग आते हैं, लेकिन यदि इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाए तो लोगों को प्रकृति के दर्शन बड़े करीब से होंगे।

शिमला शहर के आसपास ऐसे कई स्थल हैं जहां पर पर्यटक घंटों तक घूम सकते हैं। विभाग का हमेशा यही प्रयास रहता है कि ऐसे क्षेत्रों को पर्यटन के तौर पर विकसित किया जाए। इसलिए ही संबंधित पंचायत को क्षेत्र विशेष को विकसित करने के लिए बजट दिया जाता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में निजी भूमि इसमें बाधा डालती है। कई बार दूसरे विभागों से इस संबंध में एनओसी नहीं मिल पाती।

-सुरेंद्र जस्टा, उपनिदेशक, राज्य पर्यटन एवं उड्डयन विभाग

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