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विकास खण्ड पवई में ग्राम प्रधान/सचिव के साथ विकास कार्यक्रमों से संबंधित एक दिवसीय बैठक/कार्यशाला सम्पन्न

रिर्पोट-ज्ञानेन्द्र चतुर्वेदी

आजमगढ़ | जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में विकास खण्ड पवई में ग्राम प्रधान/सचिव के साथ विकास कार्यक्रमों से संबंधित एक दिवसीय बैठक/कार्यशाला सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने लेखपालों से कहा कि ग्रामवार विवादों का रजिस्टर तैयार करें तथा तालाब, चकरोड, भूमि विवाद, नाली, खड़ंजा आदि विवादों का प्रकृति के अनुसार उसका वर्गीकरण करें तथा ग्राम प्रधान/सचिव से मिल कर इसका निस्तारण करायें, जो विवाद आप लोगों के स्तर से निस्तारित नही हो पा रहा है, उसके विवाद की जानकारी उच्चाधिकारियों को दें, जिससे उसका निस्तारण समय रहते किया जा सके।
उन्होने लेखपालों को यह भी निर्देश दिये कि सार्वजनिक स्थानों में तालाब, चारागाह आदि का चिन्हांकन करें तथा गांव में खेल के मैदान का भी चिन्हांकन करें, तथा खेल का मैदान को खेलने योग्य बनायें, जिससे बच्चे उसमें खेलकर अपने शारीरिक तथा मानसिक स्थिति का विकास कर सकें।
इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा वृक्षारोपण, जल संरक्षण, तरल/ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, मनरेगा, स्वच्छता तथा ग्रामों को पालीथीन मुक्त कराने एवं आदि बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा किया गया।
जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधानों/सचिव अपने ग्रामों में गांव के लोगों को मनरेगा के अन्तर्गत लाभान्वित करायें। उन्होने बताया कि 06 पशुओं को रखने हेतु शेड का निर्माण, तरल प्रबंधन, वर्मी कम्पोस्ट, किसानों को खुद के जमीन पर पेड़ लगाने और गड्ढ़ा खोदने, खेतों का समतलीकरण और उसका संरक्षण आदि का कार्य मनरेगा से कराया जा सकता है। उन्होने ग्राम प्रधान/सचिव से कहा कि मनरेगा अन्तर्गत किसान अपने खेतों में नर्सरी भी मनरेगा के अन्तर्गत लगा सकते हैं। जिलाधिकारी ने सभी ग्राम प्रधानों को बताया कि कोई भी व्यक्ति जो मनरेगा के अन्दर 90 दिन कार्य कर लेता है तो वह व्यक्ति श्रम विभाग में भी पंजीकरण कराने के लिए पात्र होगा, यदि वह श्रम विभाग में पंजीकरण कराता है तो वह श्रम विभाग द्वारा संचालित 17 योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकता है। उन्होने कहा कि व्यक्तिगत लाभार्थी को मनरेगा, एनआरएलएम से जोड़ कर उसे लाभान्वित करें, जिससे उस व्यक्ति की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो सके, तो वह अपने जीवन में सुधार कर सकता है। आगे उन्होने कहा कि तालाबों की खुदाई के साथ तालाब के चारो तरफ सघन वृक्षारोपण, चारागाह की जमीन पर वृक्षारोपण आदि करायें। उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत लघु एवं सीमान्त कृषक पात्र हैं तथा ये लघु एवं सीमान्त कृषक मनरेगा के अन्तर्गत व्यक्तिगत लाभार्थी के रूप में मनरेगा से कार्य कर सकते हैं।
उन्होने ग्राम प्रधानों से कहा कि आज हमारे देश के सामने पर्यावरण एक चुनौती का विषय है, हम सिर्फ पर्यावरण के लिए लेख, वार्तालाप आदि तो करते हैं, लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्ष नही लगाते हैं। आज वृक्ष न लगने और वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई से भूमि, जल, हवा से संबंधित चुनौतियां हमारे सामने आकर खड़ी हो गयी हैं। उन्होने ग्राम प्रधानो सचिवों से अपील किया है कि वृक्षारोपण के प्रति लोगों जागरूक करें। उन्होने जनमानस में वृक्षारोपण के प्रति भाव जागृत करने के लिए निर्देश दिये तथा उनको राष्ट्रीय त्यौहार स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रता दिवस तथा धार्मिक त्यौहार के साथ-साथ जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी अन्य विशेष अवसर पर भी वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि वृक्ष हमारे मित्र हैं, वृक्ष के बिना जीवन सम्भव नही है, इनसे हमे आक्सीजन प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि वृक्ष हमारे लिए जीवन दायनी है। उन्होने ग्राम प्रधानो तथा सचिव से कहा कि गांव में जितनी आबादी है, उतने पेड़ लगने चाहिए।
उन्होने ग्राम प्रधानों तथा सचिवों से कहा कि हम अपने खेतों में रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करते हैं और फसलों का उत्पादन करते हैं, उसमें रासायनिक तत्वों का समावेश होने के कारण जब हम उसको खाते हैं तो तमाम प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, इससे बचने के लिए हम सभी लोगों को जैविक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए तथा सभी लोग खेतों में जैविक खाद का प्रयोग करें, इसके लिए जानवरों को पालें, उनके गोबर और मूत्र से खाद बनाकर उसका प्रयोग करें।
उन्होने ग्राम प्रधानों तथा सचिवों से कहा कि महिलाओं के समूह को आजीविका मिशन से जोड़ें। आजीविका मिशन का समूह समाज में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन ला सकता है, महिलाओं को आजीविका मिशन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें तथा उनको रिवाल्विंग फण्ड उपलब्ध करायें और उनका बैंक से लिंकेज करायें तथा उनको व्यवसाय से जोड़ें।
उन्होने तरल/ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में तथा गांवों को पालीथीन मुक्त करने के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होने ग्राम प्रधानों से कहा कि आज के समय में पानी की भयावह स्थिति है, तथा जिस तेजी से पानी का जल स्तर नीचे जा रहा है, ऐसी स्थिति में हम लोगों को जल संरक्षण को भी युद्ध स्तर पर रोकने की जरूरत है।
इस अवसर पर डीसी मनरेगा बीबी सिंह, डीसी एनआरएलएम बीके मोहन, जिला विकास अधिकारी रवि शंकर राय, उप जिलाधिकारी फूलपुर मेवालाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार यादव, खण्ड विकास अधिकारी पवई, जिला सूचना अधिकारी डाॅ0 जितेन्द्र प्रताप सिंह सहित ग्राम प्रधान, सचिव तथा लेखपाल उपस्थित रहे।

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