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प्रयास संस्था का पुनीत कार्य- बेसहारा की मदद केर पेश की मिशाल

आजमगढ़-डेस्क-रिपोर्ट-शैलेन्द्र शर्मा-सिटी रिपोर्टर 
आजमगढ़। आईये महसूस कीजिए जिन्दगी के ताप को, मै आपको ले चलूगां आराजी बैरिया गांव में, जिस खेत में भूखमरी और ठंड में तिल-तिल कर मर गयी दुखियारी सोमारी… प्रख्यात शायर अदम गोंडवी की यह पंक्तिया पूरे घटना पर बिल्कुल सटीक बैठती है। देवारा में अपने खेत में ही तितर-बितर मड़ई में दो बच्चों के साथ किसी तरह जीवन यापन कर रही सोमारी ने आखिर बुधवार को दम तोड़ दिया। विडम्बना रही कि मां के शव के पास ही दोनों अबोध बच्चे उससे लिपटकर ठंड से बच रहे थे लेकिन उन्हें यह भी नहीं मालूम था कि अब मां दुनिया में नहीं है। गुरूवार को घटना की सुगबुगाहट पाकर प्रयास संस्था के सदस्य मिथिलेश कुमार पहुंचे तो उसने पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भेजा। तब जाकर समाज को मालूम हो सका कि अब ठंड से भूखमरी की यातना से सोमारी की मौत हुई है। जानकारी मिलने पर प्रयास संस्था के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर प्रधान से पूरा मामला पूछा तो प्रधान मामले को मामूली घटना बता रहा था। इस पर जब कानूनी कार्यवाही की बात कहीं गयी और शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया तब जाकर प्रधान किसी तरह पोस्टमार्टम के लिए राजी हुआ। प्रयास संस्था द्वारा मामले को सोशल मीडिया पर डालने के बाद समाज के लोग आगे आना शुरू हुए और उसके बच्चें को आर्थिक मदद देने का क्रम शुरू हो सका। इसके बाद गांव के ही डा बृजभान प्रजापति व उनका परिवार इन अबोध बच्चों के लालन-पालन के लिए आगे आया। डा प्रजापति ने उसके सबसे छोटे बच्चों की हालत देखकर उसे चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराया और दूसरे नौ वर्षीय बच्चे को नहला कर स्वच्छ कपड़े पहनाकर समाजिक सुख पहुंचाया। पहली बार मिले सुख से नौ वर्षीय कुछ ही देर में अपनी मां को भूल गया वहीं छोटे बच्चे की ठंड लगने के कारण अभी उसका उपचार शहर के ही चिकित्सक डा बजरंग सिंह के यहां चल रहा है। जहां उसे नीमोनिया की शिकायत बतायी गयी है। वक्त के मार इन बच्चों का डा प्रजापति अभिभावक बनने के लिए तैयार है और भविष्य में हर तरह की यथासंभव मदद व पारिवारिक सुख देने का वादा किया है। डा प्रजापति से लगातार प्रशासन सामंजस्य बनाये हुए है लेकिन दुर्भाग्य है कि इस तेज तरार्र प्रशासन के नाक के नीचे ऐसी मानवीयता से परे घटना का घट जाना समाज के संवेदनहीनता की मिसाल है। डा प्रजापति ने पूरे प्रयास टीम की सराहना किया कि उनके के सम्बल से उन्होंने बच्चों को रखने का निर्णय लिया है। प्रयास के रणजीत सिंह ने कहा कि हम आगे जिला प्रशासन से बच्चों के भविष्य को लेकर ज्ञापन सौंपकर उन्हें न्याय दिलाने का काम करेंगे।
विदित हो कि महिला अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी तथा अविवाहित अवस्था में उसका गांव के एक युवक से संबंध स्थापित हो गया जिसके उपरान्त महिला को दो बेटियां और दो बेटे भी पैदा हुए। बड़ी लड़की की शादी हो गई तथा छोटी गत सितंबर माह में बीमारी से मृत हो गई। वर्तमान में एक नौ वर्ष और दूसरा डेढ़ वर्षीय पुत्र ही उसके सहारा थे। वक्त की मारी महिला किसी तरह अपना व दो बच्चों का जीवनयापन कर रही थी।
इस अवसर पर अतुल श्रीवास्तव, इंजी सुनील यादव, शम्भुदयाल सोनकर सहित आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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