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पत्नी को फंसाने के लिए इस शख्स ने रची साजिश!

जालंधर। यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। घर की करोड़ों की दौलत ठुकराकर एक व्यक्ति घर से भागकर पत्नी को फंसाने के लिए बर्तन धोने का काम करने लगा। वह भी पिछले 11 वर्ष से। इस बात की किसी को कानोंकान खबर तक नहीं लगी कि जो व्यक्ति बर्तन धो रहा है वह एक बड़़े़े धनाड्ढ परिवार का है। मामला तब खुला जब पति की हत्या का आरोप झेल रही पत्नी ने उसे ढूंढ निकाला। पुलिस के सामने उसने कुबूल किया कि वह महिला का पति है और उसने यह सब पत्नी को फंसाने के लिए किया था।

दरअसल, 11 साल पहले गुरु नानक नगर, थाना कोतवाली, रायबरेली, यूपी निवासी रविंदर कौर का पति जगजीत सिंह उर्फ सोनू पुत्र मनजीत सिंह घर से गायब हो गया था। जगजीत सिंह के पिता ने अपनी बहू रविंदर कौर, साहिबगंज फैजाबाद निवासी उसके पिता जसवंत सिंह, भाई तरनप्रीत सिंह और प्रोफेसर हर्षत सिंह पर रायबरेली कोर्ट में अपहरण और हत्या का केस दायर करवा दिया था। रविंदर कौर का दावा था कि उसका पति जिंदा है। उसने वहां के एसएसपी और डीजीपी से मदद की गुहार लगाई थी। रविंदर कौर ने अदालत में भी इंसाफ की गुहार लगाई थी और शक जताया था कि उसका पति जालंधर में है।

अदालत के आदेशों पर जालंधर देहाती के एसएसपी नवजोत सिंह माहल को रविंदर कौर के पति को ढूंढने के लिए कहा गया था। इस पर एसएसपी ने थाना लांबड़ा के प्रभारी पुष्पबाली को जगजीत सिंह उर्फ सोनू को तलाश करने की जिम्मेदारी सौंपी। इसी बीच, रविंदर कौर वीरवार को थाना प्रभारी पुष्प बाली से मिली और उन्हें सारे दस्तावेज देने के बाद पूरी घटना के बारे में बताया।

थाना प्रभारी पुष्प बाली ने गांव सिंघा मोड़ पर हरनेक ढ़ाबा से जगजीत सिंह उर्फ सोनू को पकड़ लिया। पहले तो वह खुद के जगजीत सिंह होने से इंकार करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने माना कि वह ही जगजीत सिंह है। पुलिस जगजीत सिंह को थाना ले आई, जहां पर उसकी पत्नी रविंदर कौर ने उसकी पहचान कर ली।

ढाबे पर साफ कर रहा था बर्तन

गुरुनानक नगर, थाना कोतवाली, बरेली, यूपी में करोड़ों का मालिक सोनू सिर्फ अपनी पत्नी को फंसाने के लिए ढाबे पर बर्तन साफ रहा था। सोनू के पिता का वहां पर कपड़े का बड़ा कारोबार है। खुद की फैक्ट्री भी लगाई हुई है और वहां पर वह ऐश करता था। पत्नी के साथ विवाद शुरू हुआ तो उससे तलाक मांगा। पत्नी ने तलाक देने से मना कर दिया तो वो वहां से भागकर जालंधर आ गया। लांबड़ा के मुद्दा गांव में एक ढाबे पर बर्तन मांजने की नौकरी करने लगा। तीन साल तक मुद्दा गांव में ढाबे पर काम करने के बाद वो गांव सिंघा में ढाबे पर बर्तन मांजने का काम करने लगा। ढाबे पर उसे चार हजार रुपये पगार के साथ-साथ खाना और कपड़े मिल रहे थे, जिससे वो गुजारा कर रहा था।

रिश्तेदारों के फोन पर करता था परिजनों से बात

जांच में सामने आया कि सोनू के परिजनों को पता था कि वो जालंधर, लांबड़ा के सिंघा गांव में है। उसने अपनी बदहाली की बात नहीं बताई थी कि कहीं घर वाले आर्थिक मदद न भेज दें और वह फंस जाए। यहां तक वि वह परिवार से जब भी बात करता तो रिश्तेदारों के फोन के जरिए ही करता था। उसे डर था कि कहीं परिवार के फोन को पुलिस ट्रैप पर न लगा दे।

ले डूबा अति आत्मविश्वास…

कुछ महीने पहले अपनी पत्नी फैजाबाद निवासी रविंदर कौर को फोन कर कहा था कि वह उसके घरवालों को बिना वजह तंग कर रही है। वह जिंदा है और कहां है यह वो नहीं बताएगा, दम है तो ढूंढकर दिखाए। मुझे तुम तो क्या, तुम्हारा बाप भी नहीं पकड़ा सकता। पुलिस ने उस नंबर, जिससे फोन आया था, को ट्रेस करना शुरू किया तो पता चला कि वो लांबड़ा के रहने वाले एक ऑटो चालक का है। ऑटो चालक को ढूंढा गया तो उसने बताया कि गांव सिंघा में एक ढाबे पर काम करने वाले ने उससे फोन मांगा था और कॉल की थी। ऐसे में पुलिस ने ढाबे से उसे ढूंढ निकाला। जगजीत ने घर से भागने के बाद उसने बाल कटवा लिए। इसी कारण एक बार तो उसकी पत्नी भी पहचान नहीं पाई। बाद में उसकी आवाज से उसे पहचाना।

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