Monday , September 28 2020

प्रमुख समाचार


विज्ञापन

Home / पूर्वांचल समाचार / आज़मगढ़ / चुनाव समीक्षा -आजमगढ़- नहीं आया सिम्बल काम, 90 फिसदी सीटो पर रहा निर्दलियो का कब्जा

चुनाव समीक्षा -आजमगढ़- नहीं आया सिम्बल काम, 90 फिसदी सीटो पर रहा निर्दलियो का कब्जा

आजमगढ़-डेंस्क-रिर्पोट-धर्मेन्द्र श्रीवास्तव

स्व0 गिरीश के कार्यो की याद ने शीला को दिलाई जीत

एन वक्त पर टिकट काटना राजनीतिक दलों के हार का बना कारण 

नगर निकाय चुनाव में इस बाद राजनीतिक पार्टियो के सिम्बल पर चुनाव लड़ा गया लेकिन सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में प्रदेश की अन्य जनपदो की तस्वीर भले ही भाजपा के पक्ष में रही हो लेकिन राजनीतिक रूप से पूर्वांचल का काफी प्रभावशाली जिला आजमगढ़ ने जो संदेश दिया उससे राजनीतिक दलो के होश उड़ गये। दो नगरपालिका परिषद और 11 नगर पंचायतो एंव उनके वार्डो के चुनाव परिणाम पर नजर डाले तो राजनीतिक दलो ने कुछ एक सीटो पर काबिज होकर अपनी इज्जत बचा ली। वर्ना पूरे जनपद में निर्दलियो का जबरदस्त दबदबा रहा। आजमगढ़ नगरपालिका परिषद के चुनाव ने तो राजनीतिक दल को दूसरे स्थान पर भी रखना मुनासिब नहीं समझा। यहां की मुख्य टक्कर दो निर्दलियो के बीच ही रही। एक बात और रही कि राजनीतिक दलो ने ऐन वक्त पर जनता के चहेतो का टिकट काटा तो जनता ने इन दलो की उनकी हैसियत बता दी।
आपको बतादे कि आजमगढ़ नगरपालिका परिषद की सीट पर शीला श्रीवास्तव दूसरी बार काबिज हुई है। पहली बार उन्हे महज सात माह का ही दायित्व मिला। जो उनके पति स्व0 गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव की मृत्यु के उपरान्त सम्पन्न हुए उपचुनाव में मिला। उसके बाद जनता ने पिछले चुनाव में भाजपा पर पहली बार भरोसा कर इंदिरा जायसवाल को चुनाव जीता कर कमल खिलाया और शीला श्रीवास्तव चुनाव हार गई। भाजपा को इस शहर ने एक बार जनता ने अवसर दिया लेकिन भाजपा की अध्यक्षा जनता की अपेक्षाओ पर खरी नहीं उतर सकी। थोड़ी बहुत बची साख को उनके बेटे अभिषेक जायसवाल दीनू ने झूठे वादे कर मटियामेट कर दिया। इस गंभीर संकेत से पार्टी ने उनका टिकट काट दिया लेकिन जनता का भरोसा इस पार्टी से इस कदर उतरा कि जनता ने सम्पन्न हुए चुनाव में अजय सिंह को पांचवे स्थान पर भेज दिया। इस बार फिर लोगो को स्व0 गिरीश की याद सताने लगी। उनकी पत्नी शीला श्रीवास्तव और उनके बेटे प्रणीत श्रीवास्तव हनी को लोगो ने शुरूआती दिनो से ही उनके पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया। हालाकि ऐन वक्त पर बसपा ने उनका टिकट काट दिया लेकिन जनता ने बसपा को पूरी तरह नकार दिया और निर्दल ही चुनाव में उनके सिर पर विजय का सेहरा बांधा। दूसरे निर्दल प्रत्याशी भारत रक्षा दल के हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव को भी जनता ने काफी सम्मान दिया। चुनाव भले हार गये लेकिन जनता ने उन पर भी काफी भरोसा कर दूसरे स्थान पर रखा।
तीसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी सुधीर सिंह उर्फ पप्लू को भी जनता ने प्यार दिया जो उनके स्व0 पिता त्रिपुरारी पूजन प्रताप सिंह के किये गये कार्याे का परिणाम रहा लेकिन चुनाव मैदान में देर से उतरने की वजह भी उनके हार का कारण बनी।

मुलायम के गढ़ में ही सपा के पदमाकर वर्मा उर्फ घुट्टूर इस लड़ाई में चैथे स्थान पर चले गये। उन्हें जिन मतो का ज्यादा भरोसा था उन मतो मंे काफी बिखराव हुआ और उन लोगो ने निर्दलियो पर काफी भरोसा जताया।

समाजवादी पाटी को नगरपालिका परिषद मुबारकपुर, नगर पंचायत अतरौलिया, महराजगंज सीट मिली जिससे उनकी इज्जत बच गई। भाजपा को नगर पंचायत लालगंज, सरायमीर सीट पर विजयश्री मिला तो वहीं बाकी जगहो पर निर्दल प्रत्याशियो का ही दबदबा रहा। वार्डो के चुनाव में तो 90 फिसदी निर्दल उम्मीदवार ही काबिज रहे।
बरहआल राजनीतिक दलो द्वारा जनता को अपना पीछलग्घू समझने के इस सपने को जनता ने पूरी तरह खारिज कर दिया और एक बात के साफ संकेत दिये कि चुनाव मैदान अपने को साबित करना है तो जनता के बीच में समय-समय पर पक्ष विपक्ष की भूमिका का सार्थक निर्वाह करना पड़ेगा।

 

About Bharat Good News

error: Content is protected !!