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गणेश चर्तुथी-बड़ा गणेश मंदिर पर लगेगी श्रधालुओं की भीड़

आजमगढ़ -डेस्क – रिपोर्ट- सोनू पंडित 

सभी देवी देवताओ में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा की जाती है जानते है क्यो.. आईए हम आपको बताते है। प्रचलित कथा के अनुसार भगवान गणेश सभी देवी देवताओ में सबसे पहले पूज्यनीय माने जाते है, एक बार भगवान शंकर अपने दोनो पुत्र कार्तिकेय और गणेश को सर्वश्रेष्ठ कौन है कि चुनौती देते हुए कहा कि जो समस्त देवी-देवताओ की रक्षा करेंगा और जो पृथ्वी के चक्कर मार कर सबसे पहले आएगा वो ही सर्वश्रेष्ठ होगा। पिता की आज्ञा मान कर कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने चले गये तो वहीं भगवान गणेश ने सोचा कि उनका वाहन तो मूसक यानी चूहा है वो कैसे चक्कर लगाये । तो उन्होनें अपने माता-पिता भगवान शंकर और पार्वती के अपने वाहन मूसक पर बैठकर सात चक्कर लगाये और कार्तिकेय का इंतजार करने लगे। कार्तिकेय के आने के बाद भगवान शंकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस लोक में माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं जो इनकी सेवा कर लिया वो ही सर्वश्रेष्ठ है। भगवान शंकर ने गणेश को आर्शीवाद देते हुए कहा कि सभी देवी-देवताओ की पूजा से पहले तुम्हारी पूजा होगी तुम्ही सबकी रक्षा करने में सर्वश्रेष्ठ हो। तब से किसी भी मांगलिक कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है।

क्यों कहा जाता है बड़ा गणेश मंदिर

आजमगढ़ शहर के बीच में लालडिग्गी स्थित बड़ा गणेश मंदिर की मान्यता अलग है। अपने आप में कई धरोहरो के साथ ही कई गाथाएं समेटे हुए है। सबसे पहले हम आपको बतादे कि इस गणेश मंदिर को बड़ा गणेश मंदिर क्यो कहते है।मंदिर के महंथ राजेश मिश्रा का कहना है कि  गणेश की प्रतिमा लगभग पांच फुट से अधिक है जो की पूर्वांचल के साथ ही कही अन्य जगहो पर विरलय ही दिखाई देगी। मंदिर में प्रवेश करते हुए मन को शांति मिलती है जैसे लगता है मन पूरी तरह से भक्तिमय हो गया हो ये है बड़ा गणेश मंदिर की महत्ता। वैसे तो प्रतिदिन यहां भीड़ होती है लेकिन कुछ खास दिन जैसे बुधवार और गणेश चर्तुथी को यहां मेले जैसे दृश्य देखने को मिलता है। साथ ही मंदिर में भव्य आरती, घंटे-घड़ियाल की गूंज वातावरण को और भी पवित्र कर देती है। भक्त यहां आते है और मन मांगी मुदार को पूरा करते है। महंथ राजेश मिश्रा ने बताया कि बड़ा गणेश मंदिर में उदासीन अखाड़ा भी है अब तो भागम-भाग जिन्दगी के चलते अखाड़े में सन्नाटा रहता है लेकिन जब इसकी स्थापना हुई तो यहां अखाड़े से जुड़े साधू संतो के साथ ही आस-पास के लोग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वर्जिश किया करते थे।

मुसक की भी होती है पूजा 

भगवान गणेश की बात हो और उनके सवारी की बात न की जाय ऐसा हो नहीं सकता, यहां भगवान गणेश की सवारी मूसक की प्रतिमा भी काफी बड़ी है लोग मूसक के कान में अपनी ईच्छा हो बताकर अपनी मुराद पूरी करते है। अब आप जब भी आजमगढ़ आये बड़ा गणेश मंदिर भगवान गणपति के दर्शन जरूर करे और मनवांछित मुराद का लाभ उठाये। भगवान गणेश जरूर आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। जय विघ्नहरण, मंगल करण।

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