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किसान पाठशाला के तीसरे दिन कृषकों की आय दोगुनी करने की दी गई जानकारी

रिर्पोट-ज्ञानेन्द्र चतुर्वेदी

आजमगढ़ |  किसान पाठशाला के तीसरे दिन कृषकों की आय दोगुनी करने की रणनीति तथा कृषक उत्पादक संगठन के गठन के बारे में जानकारी दी गई।
गांव चक इनामी विकासखंड पल्हनी में किसान पाठशाला को संबोधित करते हुए उप कृषि निदेशक डाॅ0 आरके मौर्य द्वारा बताया गया कि कृषकों की आय दोगुनी करने की तीन सूत्र हैं, नंबर 1 उत्पादन बढ़ाना, नंबर दो खेती की लागत कम करना तथा नंबर 3 मूल्य संवर्धन एवं लाभकारी विवरण। उप कृषि निदेशक द्वारा बताया गया कि किसान भाई गर्मी में 15 सेंटीमीटर गहरी जुताई अवश्य करें, इससे मिट्टी में नुकसानदायक कीड़े मकोड़े तथा बीमारियां, खरपतवार नष्ट हो जाएंगे। फसल चक्र अपनाएं, समय से धान की नर्सरी डालें उसकी देखभाल करें, समय से धान की रोपाई करें, बीजों के चयन में सावधानी बरतें ,उन्नत किस्म के ही बीजों का प्रयोग करें, बीज शोधन अवश्य करें। मृदा परीक्षण के आधार पर संस्तुति उर्वरकों का प्रयोग करें और समेकित कृषि प्रणाली को अपनाते हुए कृषि के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, बकरी पालन तथा सूकर पालन को भी अपनाएं। इससे बाढ़ सूखा अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा से भी सुरक्षा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि समेकित कृषि प्रणाली का मूल सिद्धांत संरक्षित खेती है।
उप कृषि निदेशक द्वारा बताया गया कि जीरो बजट या ऑर्गेनिक खेती द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ खेती की लागत को कम करके उच्च गुणवत्ता के जैविक उत्पादों को प्राप्त कर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। किसानों की आय दोगुनी करने में मूल्य संवर्धन एवं लाभकारी विपणन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लाभकारी विपणन के लिए फसल का चुनाव, उत्पादों की ग्रेडिंग बाजार की सूचना प्राप्त करने के लिए एगमार्कनेट, उत्तर प्रदेश कृषि विपणन, उत्तर प्रदेश मंडी भाव ऐप तथा उत्तर प्रदेश मंडी परिषद की सहायता ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिचैलियों से सतर्क रहकर अपने उपज को सीधे बाजार अथवा उपभोक्ता को विक्रय करने से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
किसानों को संगठित कर कृषक उत्पादकता संगठन के गठन के बारे में जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक द्वारा बताया गया कि कंपनी अधिनियम 1956 को संशोधन करके देश के किसानों को भी कंपनी बनाकर संगठित रूप से बिजनेस करने का अवसर सरकार ने दिया है। इसके लिए किसानों को किसान उत्पादक संगठन या फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाने के लिए सबसे पहले उत्पादक समूह बनाना चाहिए। यह उत्पादक समूह अनाज, दलहन, तिलहन, बीज उत्पादक, दुग्ध उत्पादक, सब्जी उत्पादक इत्यादि गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। इसमें एक समान उत्पाद का उत्पादन करने वाले तथा कृषकों की समान मूलभूत आवश्यकता रखने वाले कृषक समूह संगठित होकर नई तकनीकी प्राप्त कर बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। इससे लागत कम आएगी, कृषि निवेशकों की व्यवस्था में आसानी होगी, बाजार से सीधे जुड़ सकते हैं, उत्पाद की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और सामूहिक रूप से बिक्री करने में अधिक दर पर अपने उत्पाद बेच सकते हैं। वित्तीय प्रबन्धन में सुविधा होगी।
विस्तृत जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक द्वारा बताया गया कि 10 से 15 कृषक परिवारों को सम्मिलित करते हुए उत्पादक समूह गठित किया जा सकता है। प्रत्येक ग्राम में इस प्रकार के चार से पांच उत्पादक समूह बनाते हुए 15 से 20 ग्रामों में उत्पादक समूह का गठन करते हुए लगभग 1000 से अधिक कृषक परिवारों को फार्मर प्रोडूसर कंपनी का गठन की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए जनपद में कई एफबी सक्रिय हैं उनका मार्गदर्शन लेकर इसका गठन कर सकते हैं।
उपस्थित कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि जिन किसानों ने अभी तक अपने अभिलेख पंजीकरण हेतु नहीं दिए हैं और उनके नाम से भूमि है वह अविलंब अपने विकासखंड के कृषि विभाग के कार्मिक से संपर्क कर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध करा दें जिससे अवशेष किसानों का पंजीकरण कराया जा सके।
किसान पाठशाला में प्रधान खोजापुर श्री चंदन निषाद, प्रगतिशील किसान फैसल बैग, सुशीला, गिरिजा नेमुला बेग, जिव नंदन तथा प्राविधिक सहायक हरिहर यादव सहित 80 कृषको, जिसमे 32 महिलाएं सम्मिलित थी, इस पाठशाला से लाभान्वित हुए।
आज जनपद में विभिन्न विकास खण्डों में आयोजित किसान पाठशाला में कुल 14952 कृषकों ने प्रतिभाग किया, जिसमें 4037 महिला कृषकों की सहभागिता रही।

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