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काशी शहर में तेजी से बढ़ता जा रहा है ‘गंदा कारोबार’

पूर्वांचल डेस्क :- Gnewspurvanchal 

वाराणसी :- काशी में सेक्स का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा। कह सकते हैं कि काशी इन दिनों सेक्स टूरिज्म का हब बनता जा रहा है। रेड लाइट एरिया अब पुराने जमाने की बात हो चुकी है। किराये के मकानों से लेकर महंगे अपार्टमेंटों में इन दिनों जिस्मफरोशी का धंधा तेजी से चल रहा है। नेटवर्किंग कारोबार की तर्ज पर चल रहे इस गंदे धंधे में ग्राहक की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

डिमांड के अनुसार उन्हें हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल्स से लेकर बेबस लड़कियां उपलब्ध कराई जाती हैं। जिस्मफरोशी के कारोबार का संचालन करने वालों ने नेटवर्किंग के जरिए इस समय पूरे देश में जाल फैला रखा है। इस कारोबार में ऐसी तेजी आई है कि एक शहर में कॉल गल्र्स को एक हफ्ते से अधिक समय तक रोका नहीं जा रहा है।

एक से जुड़ता है दूसरा और दूसरे से तीसरा: बीते एक साल में वाराणसी पुलिस एक भी सेक्स रैकेट का खुलासा नहीं कर पाई है। ऐसा नहीं है कि जिस्मफरोशी का धंधा बंद हो गया है, बस हाईटेक हो गया जिसे पकड़ना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर है। रिपोर्टर को अपनी एक महीने की पड़ताल में पता चला कि यह पूरा खेल फोन नंबर पर है। सबसे पुराने ग्राहक के पास कॉल गर्ल्स की सप्लाई करने वाली महिला, पुरूष का फोन नंबर होता है। उसके बाद वहीं नंबर पुराना ग्राहक अपने मित्र या उसके किसी खास को उपलब्ध कराता है।

देना पड़ता है परिचय: पहले ग्राहक से मिले मोबाइल नंबर पर जब दूसरा संपर्क करता है तो उसे पहले वाले का परिचय देना पड़ता है। बस, इसी तरह से यह नंबर दूसरे से तीसरे और चौथे के पास पहुंचता है। सेक्स रैकेट चलाने वाले समय-समय पर अपने मोबाइल नंबर भी बदल देते हैं। नंबर बदलते हीं इसकी जानकारी ग्राहकों को दे दी जाती है।

दो ग्रुप में बंटा है कारोबार: सेक्स का कारोबार दो ग्रुप में बंटा है। एक ग्रुप हाईप्रोफाइल कॉल गर्ल्स का है जो फर्राटेदार अंग्रेजी के साथ ही महंगे कपड़े व मेकअप में रहती हैं। इनकी अधिक डिमांड हाई प्रोफाइल पार्टियों व दस से बीस हजार रुपये तक झटके में फेंकने वालों के बीच रहती है।

कई बड़े शहरों में होती है सप्लाई: ये मुंबई, दिल्ली, कोलकाता से लेकर अन्य महानगरों व कालेज से सप्लाई की जाती हैं। देह की इस मंडी में दूसरा ग्रुप वह है जो बेबस लड़कियों का है। सिक्किम, नेपाल, झारखंड, पश्चिम बंगाल से लेकर गरीब परिवारों की लड़कियां शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इस ग्रुप की कम उम्र की लड़कियों की डिमांड अधिक है।

नौकरी- पढ़ाई के नाम पर बनाया जाता है ठिकाना: सेक्स का कारोबार अब बदनाम गलियों से उठकर पॉश इलाकों में पहुंच गया है। सेक्स रैकेट चलाने वालों ने अब महंगे अपार्टमेंट व किराये के कमरों को अपना ठिकाना बनाया है।

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