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कार्निया ट्रांसप्लांटेशन का आज़मगढ़ में खुला पहला हास्पिटल,डा0श्रवण यादव करेंगे कार्निया का ट्रांसप्लांट

रिपोर्ट-यशपाल सिंह 

अगर आप कार्निया प्रत्यारोपण कराना चाहते है तो घबराइए मत अब यूपी में वाराणसी गोरखपुर लखनऊ सहित कई बड़े महानगरों का सफर नहीं तय करना होगा | अब आपको ये सुविधा आजमगढ़ में ही मिल जाएगी | आजमगढ़ के करतालपुर बाईपास पर स्थित आई केयर हॉस्पिटल में डाक्टर श्रवण यादव आपके कार्निया का ट्रांसप्लांट कर देंगे | यूपी गवर्नमेंट द्वारा आजमगढ़ के इस अस्पताल को (HOTA ) यानी  ह्यूमन ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन एक्ट के तहत मान्यता प्रदान कर दी गयी है | आजमगढ़ के सीएमओ डाक्टर ए के मिश्रा ने शनिवार को इस अस्पताल में इस सुविधा का विधिवत फीता काटकर उद्घाटन किया और कहा कि आजमगढ़ ,मऊ बलिया व् आसपास के जनपदों में कार्निया प्रत्यारोपण का ये पहला अस्पताल है अब यहाँ के लोगो को बाहर जाने की जरुरत नहीं है |इस सुविधा पर डाक्टर श्रवण को आईएम ए आजमगढ़ ने बधाई दिया है | डाक्टर  ए के मिश्रा ने कहा कि कार्निया ट्रांसप्लांट के लिए आई बैंक से कार्निया लेना होता है | आई बैंक वाराणसी,गोरखपुर लखनऊ में है | मान्यता मिलने के बाद आजमगढ़ के इस अस्पताल को  इन आई बैंकों से कार्नियाआसानी से मिल जायेगी |

                 अस्पताल में कार्निया ट्रांसप्लांट यूनिट के उद्घाटन के बाद आई केयर हास्पिटल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डाक्टर  श्रवण यादव ने विस्तार से कार्निया ट्रांसप्लांट के बारे में बताया | कहा कि ये एक जटिल बीमारी है जो प्रायः शुरुआती दौर में मरीज की लापरवाही से होती है और अंत मे इसका ट्रांसप्लांट ही कराना पड़ता है ।

        आई एम् ए के अध्यक्ष डाक्टर डीपी राय और सचिव  ने कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा आजमगढ़ में शुरू किये जाने पर ख़ुशी जाहिर की और कहा की आजमगढ़ निरंतर चिकित्सा के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है ये काफी गौरव की बात है कि पूर्वांचल में वाराणसी गोरखपुर के बाद आजमगढ़ में भी अब कार्निया ट्रांसप्लांट हो सकेगा |  
        आपको बता दें कि कार्निया ट्रांसप्लांट एक जटिल सर्जरी है इसकी मान्यता उन अस्पतालों को जांच के बाद दी जाती है जिनके पास एडवांस मशीन है और एक्सपर्ट आई सर्जन है  सभी जाँच और निरिक्षण के बाद डाक्टर श्रवण यादव की देखरेख में इसका इलाज़ किया जाएगा | 
       पूरे भारत में कार्निया की बीमारी से करीब 68 लाख लोग पीड़ित है और सुविधाओं के अभाव में प्रति वर्ष 25 से 3० हज़ार लोग इसकी चपेट में बढ़ रहे है | 
साइट लाइफ और द हंस फाउंडेशन के सहयोग से केजीएमयू में आई बैंक की स्थापना की गई है। वर्ष 2016 में स्थापित आई बैंक लगातार दानदाताओं को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में वर्ष 2016 में 720 कार्निया प्रत्यारोपण हुए थे। आई बैंक की स्थापना होने के बाद इसकी संख्या में इजाफा हुआ है। इसके तहत वर्ष 2017 में 1407 और वर्ष 2018 में 1581 लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण किया गया है।

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