Tuesday , October 22 2019

प्रमुख समाचार


Home / पूर्वांचल समाचार / आज़मगढ़ / उत्तराखंड के इस गांव में दशहरे के दिन होता है युद्ध!

उत्तराखंड के इस गांव में दशहरे के दिन होता है युद्ध!

साहिया। जिस तरह कुमाऊं क्षेत्र के चंपावत में परंपरा से जुड़ा बग्वाल उत्सव प्रसिद्ध है, उसी प्रकार जनजाति क्षेत्र जौनसार में गागली युद्ध परंपरा का हिस्सा बन चुका है। यह युद्ध पाइंते यानि दशहरे पर रावण दहन की जगह ग्रामीणों द्वारा आपस में अरबी के पौधों से खेला किया जाता है। इसके पीछे दो बहनों से जुड़ी कहानी प्रचलित है। इस दौरान ग्रामीण युद्ध कर पश्चाताप करते हैं। खास बात यह है कि युद्ध में न तो कोई हारता है और न ही विजयी होता है।

इस बार आठ अक्टूबर मैदानी इलाकों में दशहरा जबकि जौनसार बावर में पाइंता पर्व मनाया जाएगा। पाइंता पर्व पर कुरोली और उत्पाल्टा गांवों के ग्रामीणों के बीच गागली युद्ध होगा, दोनों गांवों के ग्रामीणों ने गागली युद्ध की तैयारियां पूरी कर ली है। गागली युद्ध में दोनों गांवों के ग्रामीण गागली यानि अरबी के पत्तों और डंठलों से जंग लड़ते हैं। कालसी ब्लॉक क्षेत्र के कुरोली और उत्पाल्टा के ग्रामीण पाइंता पर्व पर अपने अपने गांव के सार्वजनिक स्थल पर इकट्ठे होकर ढोल नगाड़ों के साथ ही रणसिंघे की थाप पर हाथ में गागली के डंठल और पत्तों को लहराते हुए नाचते-गाते नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर देवधार नामक स्थल पर पहुंचेंगे। यहां दोनों गांवों के ग्रामीणों के बीच गागली युद्ध की शुरूआत होगी। ग्रामीण राजेंद्र राय, श्याम सिंह राय, हरि सिंह, जालम सिंह, गुलाब सिंह, रणवीर राय आदि बताते हैं, पहले युद्ध होता है और फिर दोनों गांवों के ग्रामीण गले मिलकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं। उसके बाद उत्पाल्टा गांव के सार्वजनिक स्थल पर ढोल नगाड़ों की थाप पर सामूहिक रूप से पारंपरिक तांदी, रासो, हारुल नृत्यों का दौर चलता है।

गागली युद्ध के पीछे की कहानी

किवदंती है कि कालसी ब्लॉक के उत्पाल्टा गांव की दो बहनें रानी व मुन्नी गांव से कुछ दूर स्थित क्याणी नामक स्थान पर कुएं में पानी भरने गयी थी, रानी अचानक कुए में गिर गई, मुन्नी ने घर पहुंच कर रानी के कुएं में गिरने की बात कही तो ग्रामीणों ने मुन्नी पर ही रानी को कुएं में धक्का देने का आरोप लगा दिया, जिससे खिन्न होकर मुन्नी ने भी कुएं में छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। ग्रामीणों को बहुत पछतावा हुआ। इसी घटना को याद कर पाइंता से दो दिन पहले मुन्नी व रानी की मूर्तियों की पूजा होती है, पाइंता के दिन मूर्तियां कुएं में विसर्जित की जाती है। कलंक से बचने के लिए उत्पाल्टा व कुरोली के ग्रामीण हर वर्ष पाइंता पर्व पर गागली युद्ध का आयोजन कर पश्चाताप करते हैं।

About Bharat Good News

Leave a Reply

error: Content is protected !!